Raksha Bandhan Kab Hai | रक्षाबंधन कैसे मनाते हैं

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आज हम बात करने जा रहे हैं एक महत्त्व पूर्ण भारतीय  त्यौहार के बारे मैं जो की भाई बहन के प्यार से जुड़ा हुआ है अब तक तो आप समझ ही गये होंगे जी हाँ आज हम आपको बताने जा रहे हैं रक्षाबंधन  (Raksha Bandhan History) के बारे में रक्षाबंधन एक हिन्दू पर्व है जो की श्रवण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है इस दिन भाई बहन  सुबह जल्दी स्नान करके भगवान की पूजा करके एक थाली में  रोली चावल और दिया रखकर उसमे राखियाँ रखकर आपने भाइयों को तिलक लगाकर उनके हाथों पर राखी बंधती हैं और भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं पूरे दिन सभी लड़के आपने पड़ोस मैं सभी लड़कियों से राखी बंधवाते हैं और सभी को तरह तरह के तोहफे भी देते हैं वैसे इस दिन मूलतः दो चीजें भरती हैं जो की हैं बहनों की गुल्लक और भाइयों के हाथ

तो चलिये आज हम आपको बतातें हैं राखी बंधने का शुभ मुहूर्त और इससे जुडी हुई कथाएँ

Raksha Bandhan History | रक्षा बंधन शुभ मुहूर्त कब बंधे राखी | Raksha Bandhan Time

इस साल 22 अगस्त को रक्षा बंधन है, इस बार राखी बंधने का शुभ मुहूर्त (Raksha Bandhan Time) सुबह के 9 :28 मिनट से 21 :14  तक रहेगा. मतलब इस बार का मुहूर्त लगभग 12 घंटे का रहेगा.

रक्षाबंधन भद्र मुहूर्त (Raksha Bandhan Time) मै नही मनाना चाहिए क्युकी ऐसा माना जाता है की भद्र शनि देव की सगी बहन हैं जो की माता छाया सर उत्त्पन्न हुई हैं जिनका रंग काला है केश लम्बे हैं और दंत बहुत ही विकराल हैं  उनका जनम होते ही वे सभी शुभ कार्यो मै विघ्न डालने लगी यग्य और मंगल कार्यो में बढ़ा डालने लगी उनको ऐसा करते देखकर कोइ देव उनसे विवाह के लिए तैयार ना हुआ जब सूर्य देव ने उनके लिए स्वयंवर आयोजित  किया तो कोई देव उनसे विवाह के लिए तैयार ना हुए.

तब सूर्य देव ने ब्रह्मा जी से भद्र को समझाने का आग्रह किया तब ब्रह्मा जी ने उन्हें समझाया की पुत्री तुम सभी बल बालव  सभी करणों के  आखिर में स्थित  हो  जो विष्टि के नाम से प्रचलित होगा जो भी तुम्हारे समय के अंतर्गत जो भी शुभ कार्य करेगा तुम उसके कार्य में बढ़ा उत्पन्न करो और जो भी तुम्हे अपमानित करे तुम उसके कार्य को पूरी तरह समाप्त कर दो कहा जाता हैं की भद्र मुहूर्त में भद्रा आपने भाई शनि देव को राखी बंधती है तो वह मुहूर्त भद्र का माना जाता है

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इंद्र इन्द्राणी की कथा | Raksha Bandhan Time | रक्षाबंधन निबंध

कहा जाता की एक बार देव असुरों के बीच में देवासुर संग्राम हुआ जिसमें असुर राज बलि से देवों का युद्ध हुआ परन्तु उस युद्ध मैं देवताओं की पराजय होने लगी तो इंद्र सभी अन्य देवों  के साथ अमरावती चले गये उधर बलि ने स्वर्ग के साथ साथ पृथ्वी  पर भी अपना परचम  स्थापित कर लिया चारों तरफ अंधकार पाप और अन्याय देखकर इंद्र बहुत परेशान हुए और देवों के गुरु बृहस्पति  के पास गये बृहस्पति तब गुरु बृहस्पति ने उन्हें उनकी पत्नी शची से रक्षा सूत्र बंधवाने (Raksha Bandhan History) को कहा शची ने इंद्रा को रक्षा सूत्र बाँधा और इंद्रा देव सभी देवों के साथ युद्ध के लिए निकाल गए  और इसके कारण देवों को बलि के विरुद्ध  विजय मिली

द्रौपदी और कृष्ण की कथा | Raksha Bandhan Meaning | Raksha Bandhan Time

कहा जाता है की द्रौपदी और कृष्ण ने भी रक्षाबंधन (Raksha Bandhan History) मनाया था और समय आने पर श्री कृष्ण ने भी द्रौपदी के मान की रक्षा की थी इसके पीछे की कहानी महाभारत से जुडी हुई है कहानी यह है की जब युधिष्टिर  इन्द्रप्रस्थ के राजा बने तो उनके राज्याभिषेक का कार्यक्रम था जिसमे सभी बड़े राजाओं और सगे सम्बंदियों को बुलाया  गया जिसमे कृष्ण ,दुर्योधन ,कर्ण, पितामह भीष्म और शिशुपाल आदि थे

शिशुपाल रिश्ते मैं श्री कृष्ण का भाई मतलब की बुआ का बेटा था जिसके जन्म के समय तीन आखे और चार हाथ थे जब उसके माता पिता उसके रूप को देखकर परेशान हो गये और उसे मरने ही वाले थे तभी एक आकाशवाणी हुई जो की इस प्रकार थी की यह बालक किसी एक व्यक्ति की गोद मैं बैठकर ठीक हो जायेगा और यह जिसकी गोद मैं ठीक होगा वो ही इसका वध करेगा वो व्यक्ति श्री कृष्ण ही थे जिनकी गोद मैं बैठने से शिशुपाल ठीक हुआ था.

परन्तु उसकी माता के भय के कारण श्री कृष्ण ने आपनी बुआ को वचन दिया की वे उसकी 100 गलतियाँ माफ़ करेंगे पर 101वीं गलती का दंड भी देंगे लेकिन उस सभा मैं शिशुपाल ने श्री कृष्ण को 100 अपशब्द कहें थे जिसके बाद 101वा अपशब्द कहने पर श्री कृष्ण ने सुदर्शन से उसके सर को धड़ से अलग कर दिया ताब सुदर्शन चक्र से उन के हाथ  से भी रक्त निकला ये द्रौपदी से नहीं देखा गया और उसने आपही सदी का पल्लू फाड़कर भगवन कृष्ण के हाथ में बांध दिया तब श्री कृष्ण ने यह ऋण चुकाने का वचन दिया और बाद मैं द्रौपदी के चीर हरण के समय उसके सम्मान की रक्षा की

हुमायूँ और कर्णवती की कहानी | रक्षाबंधन निबंध | Raksha Bandhan History

चित्तोड़ की रानी कर्णवती ने भी मुग़ल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजी थी ताकि वे गुजरात के बादशाह के विरुद्ध मैं लड़ाई में उनकी मदद कर सके लेकिन उन्हें चित्तोड़ पहुचने मैं बहुत देर हो गयी थी जिसके कारण  रानी कर्णवती की मृत्यु हो गयी थी

फिर बाद मैं मुग़ल बादशाह ने अपनी बहन  की मृत्यु का बदला गुजरात के बादशाह से लिया था

यमदेव और देवी यमुना की कथा | Raksha Bandhan | रक्षाबंधन का त्यौहार

एक बार जब देवी यमुना ने अपने भाई यम देव को अपने निवास पर बुलाया तो वह नहीं आए उनके बार बार आघ्रह करने के बाद उन्होंने यमुना देवी को विश्वास दिलाया की वे उनके पास जल्द ही आयेंगे फिर कुछ समय बाद यम देव देवी यमुना के निवास पर पधारे देवी यमी ने उनका बहुत ही आचा स्वागत किया और उनके हाथ पर एक सूत्र बांध दिया.

इस पर खुश होकर यम देव ने देवी यमुना को अमरता का वरदान दे दिया भाई बहन  का प्रेम तो देखिये जो सबके प्राण को ले लेते है उन्होंने ही प्राणों के अमर होने का वरदान दे दिया.

 

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