बसंत पंचमी कब है ? वसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है ?

Vasant Panchmi Aur Vasant Ritu

आज हम फिर से हाजिर हैं एक और नई जानकारी वसंत ऋतु और वसंत पंचमी (Vasant Panchmi Aur Vasant Ritu) के साथ तो आज हम आपको एक बहुत ही प्रचलित त्योहार के बारे में बताने वाले हैं. जिस त्योहार का नाम है वसंत पंचमी जी हां वसंत पंचमी एक हिंदू पर्व हैजिसे श्री पंचमी भी कहा जाता है और इस दिन देवी सरस्वती की आराधना की जाती है.

यह त्यौहार एक ऋतु का आगमन होता है जिसका नाम है वसंत ऋतु और उसी के नाम से इस त्यौहार को जाना भी जाता है.

बसंत पंचमी कब है ?

इस साल 16 फरवरी 2021, दिन मगलवार को वसंत पंचमी का पर्व मनाया जायेगा. इस बार वसंत पंचमी बहुत ही शुभ नक्षत्र रेवती नक्षत्र में पड़ने वाली है जिससे इस पर्व की महत्ता और भी बढ़ गयी है. शुभ पूजा पाठ व विधि विधान के लिए सुबह 7 बजे से लेकर लगभग दोपहर 12:30 तक का समय अति उत्तम रहेगा.

वसंत पंचमी और वसंत ऋतू (Vasant Panchmi Aur Vasant Ritu) | वसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है ?

वसंत पंचमी (Vasant Panchmi Aur Vasant Ritu) माघ मास शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। इस दिन से वसंत ऋतु का आगमन होता है। वसंत ऋतु को ऋतु को राजा भी कहते हैं क्योंकि ऋतु के प्रारंभ होते ही पृथ्वी अपने पुराने श्रृंगार को उतारकर नया श्रृंगार करती है।

बसतं ऋतु  (Vasant Panchmi Aur Vasant Ritu) अपने साथ लेकर आती है एक नई ऊर्जा. वसंत ऋतु के आने से पतझड़ का अंत और पेड़ों पर नए पत्ते रंग बिरंगे फूल आने की शुरुआत हो जाती है यह ऋतु सृष्टि के एक नए चक्र को प्रारंभ करती है.

इस ऋतु में एक सकारात्मक ऊर्जा का क्या प्रागटय होता है जोकि हमें बताता है की समस्याओं के बाद ही खुशियों का उजाला होता है और परिवर्तन ही संसार का नियम है.

इस ऋतु में प्रकृति अपने आप को एक नई दुल्हन की तरह तैयार करती है. वह पुराने पत्ते त्याग कर नए पत्तों से और फूलों से अपना सिंगार करती है यह ऋतु बहुत ही मनोरम होती है खेतों में लहलहाती फसल रंग बिरंगे फूल सभी का मन मोह लेते हैं.

वसंत पंचमी और मां सरस्वती | Vasant Panchmi Aur  Ma Saraswati

वसंत पंचमी को मां सरस्वती का जन्म दिवस भी कहा जाता है ।कहा जाता है कि जब ब्रह्मा जी ने यह सृष्टि बनाई और मानव जाति का सृजन किया तो वे पृथ्वी पर भ्रमण करने गए वहां जाकर उन्हें संतोष नहीं हुआ.

वे सोचने लगे की है इतनी सुंदर सृष्टि है परंतु इसमें वाणी नहीं है तब उन्होंने अपने कमंडल में से जल निकालकर जमीन पर छिड़का उस जल में से एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई जिसके एक हाथ में वीणा थी दूसरी हाथ में किताबें और गले में एक बहुत सुंदर माला थी उसने श्वेत वस्त्र धारण किए हुए थे जब स्त्री प्रकट हुई तो उसने वीणा वादन करके सृष्टि को वाणी दी तब से उन्हें मां सरस्वती के रूप में जाने जाने लगा.

तब से उन्हें मां सरस्वती के रूप में जाने जाना लगा।एक और पौराणिक कथा के अनुसार वसंत पंचमी के दिन ही सर्वप्रथम भगवान श्रीकृष्ण ने और ब्रह्मा जी ने देवी सरस्वती की पूजा की थी और श्री कृष्ण ने देवी सरस्वती को वरदान दिया था कि इस संसार में जो भी व्यक्ति विद्या चाहेगा वह आपको जरुर पूजेगा।

Vasant Panchmi Aur Vasant Ritu- वसंत पंचमी और पीला रंग | Vasant Panchmi Aur Peela Rang

वसंत पंचमी के दिन पीले रंग का बहुत महत्व होता है, और सिर्फ वसंत पंचमी क्यों पूरे साल पीले रंग का बहुत ही महत्व माना गया है. यह रंग बहुत ही शुभ और सकारात्मक माना जाता है.

कहां जाता है कि यह रंग शुभता का प्रतीक होता है और जीवन के हर पहलू से यह रंग कहीं ना कहीं जुड़ा होता है. पीला रंग मां सरस्वती का बहुत ही प्रिय रंग है. इसलिए वसंत पंचमी के दिन पीले रंग को विशेष महत्व दिया जाता है यह रंग ज्ञान का रंग भी होता है.

इसके अलावा वसंत पंचमी के दिन सूर्य उत्तरायण भी होता है जिसके पीले किरण होने के कारण भी इस दिन इस रंग को विशेष महत्व दीया जाता है.

वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करते हुए पीले वस्त्र एवं पीले भोग अर्पित करने का विधान है मां सरस्वती को पीले पुष्प अर्पण किए जाते हैं.

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आदिती दिमागीकीड़ा  की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दिमागीकीड़ा के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दिमागीकीड़ा की SEO एक्सपर्ट भी हैं, इनके प्रयासों के कारण दिमागीकीड़ा एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं

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